उड़ो न इतना – Inspirational Poem

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उड़ो न इतना,
ये घमंड रुपी पंख लगाए,
की पैरों तले जमीन खिसक जाए,
ओर ख़बर भी न हो।

उड़ो इतना,
की पैरों तले जमीन खिसके तो,
एहसास हो जाये,
जमीन खिसकने का।

उड़ो न इतना,
की पैरों तले जमीन खिसक जाए,
ओर ये पंख तरस जाए आराम को,
पैर मंजिल को,
ओर मन जमीन को।

उड़ो न इतना,
की कल को लौट के आना चाहो,
ओर आ भी न पाओ।

उड़ो न इतना,
के आसमा आसमा न रहे,
ओर जमीन ज़मीन।

उड़ो इतना,
के न साथ छूटे जमीन का,
ओर आसमा भी तुम्हारा हो।